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बैठे थे वहाँ पीते चाय.. जहाँ पुरानी यादें हैं जुड़ी महफ़िल-ए-यारां वह.. हमनफ़स वो अब नहीं! - मानस रूमानी ('होटल रूपाली', पुणे में चाय पीते!) (अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस पर!)
यहाँ अवाम परेशानियों से जूझ रही है.. वहाँ हुक्मरान जैसे चॉकलेट डे मना रहे! - मानस रूमानी
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ये कैसी हमारी वफ़ा-ए-मोहब्बत है न इज़हार किए इश्क़ में ताउम्र है! - मानस रूमानी
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प्यार जगाके, न रुकके हो जाते रुख़्सत कहीं फ़ितरत या होशियारी होती ये हुस्नवालों की! - मानस रूमानी
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पत्थर के सनम बन गए है अब वे जो हमारे हमनफ़स हुआ करते थे - मानस रूमानी
ख़ुद-कफ़ील हो अवाम जिस सरज़मीन मिटा नहीं सकता कोई ऐसी सरज़मीन! - मानस रूमानी
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उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी