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Showing posts from November, 2017
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जज़बात, प्यार में परेशान होता है.. संभाल के रखना इसे दिल कहेते है! - मनोज 'मानस रूमानी'
समां रंगीन करो विज्ञान के गुब्बारों से..  ना कि मैला करो दकियानूसी पाखंड़ से! - मनोज 'मानस रूमानी'
केसरियाँवालों जानों लेखक-कलाकारों को बैर नहीं..इंसानियत प्यार चाहनेवालों को! - मनोज 'मानस रूमानी'
सरहदें तो पहले ही बनी बाटने वतन...  अब ना बाटो समाज और न छेदों दिल! - मनोज 'मानस रूमानी'
तसव्वुर में वह अक़सर आते  ना जाने कब दीदार हो जाये! - मनोज 'मानस रूमानी'
मुख़्तलिफ़ मुश्क़िल मोड़ है ज़िंदगी के.. बस आरज़ू यहीं मंज़िल तो हसीन मिले! - मनोज 'मानस रूमानी'
सरहदें-दीवारें ना खड़ी करों  दोस्तीं-प्यार के पूल बांधो! - मनोज 'मानस रूमानी'
हरे पत्तों से आती सूरज की किरणें  भर दे रोशनी अंधियारी जिंदगी में! - मनोज 'मानस रूमानी'
रहे सब ज़िंदगियाँ सलामत  मनाते रहें दिवाली और ईद! - मनोज 'मानस रूमानी'
मुख़्तलिफ़ लहरों का समंदर है इश्क़  प्यार का जुनून हो तो मिलते है दिल! - मनोज 'मानस रूमानी'
डीमोनेटायझेशन में बेवज़ह पीस गए आम.. नौ दो ग्यारह तो पहले ही हो चुके थे खास.! अब हो रही है कैशलेस इकॉनमी की बात.. फिरसे मुनाफ़ेदार खास और कैशलेस आम! - मनोज 'मानस'
दूर से लुभावना लगता है महानगर  जान लो कैसे लेते है ज़िंदगी गुज़ार! - मनोज 'मानस रूमानी'
ग़ुलाबी लबों ने की इज़हार-ए-मोहब्बत.. हुस्न से हुई दिल-ए-आशिक़ पर इनायत! - मनोज 'मानस रूमानी'
ज़िंदगी भी इंद्रधनुष की तरह ही है.. सुख-दुख-प्यार ऐसे सतरंग है इसमें! - मनोज 'मानस रूमानी'
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नीला आसमाँ..झील  इनमें ख़िले पर्बत! चाहीए गुलाबी रंग  लाए वह मोहब्बत! - मनोज 'मानस रूमानी'
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डूबता सूरज देखकर नाव में यह सफर  होगा हसीन जब पास होगा मेरा चाँद! - मनोज 'मानस रूमानी'
सब कुछ निजी बख़ूबी छुपा जाएगा  लेकिन आँखे इश्क़ कर देंगी बयां! - मनोज 'मानस रूमानी'
इतना जोर नहीं है समंदर की लहर में  मिटा दे साथ चले प्यार की निशानें! - मनोज 'मानस रूमानी'
तुम्हारा यूँ अंजाने में छू कर गुज़रना.. रेशमी अहसास था प्यार जगानेवाला! - मनोज 'मानस रूमानी'
'देवदास' तब तक बार बार होते रहेंगे... जब तक मोहब्बत सफल होने नहीं देंगे! - मनोज 'मानस रूमानी'
रू-बरू जब भी होते है आप के हुस्न से. . मोरपंख गुजरता है इस दिल-ए-इश्क़ से! - मनोज 'मानस रूमानी'
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दिखता है मायूस चाँद उपर आसमाँ का  शायद देखा बेदाग हुस्न हमारे चाँद का! - मनोज 'मानस रूमानी'
दोस्ती मुबाऱक! अच्छे स्नेही-प्रियजनों का साथ रहेना.. दिखता है ख़ूबसूरत फ़ूलों का गुलदस्ता! - मनोज 'मानस रूमानी'
सरहदों के उस पार भी  करते है हमें प्यार कोई! धड़के है दिल हमारा भी  उनसे हमें भी है इश्क़ ही! - मनोज 'मानस रूमानी'
सरहदें नहीं रोक सकती.. मोहब्बतें इस-उस पार की! - मनोज 'मानस रूमानी'
वह फूलों का दुपट्टा लपेटे है  या नर्गिस को फूल समेटे है! शरमाया उसमें हसीन रुख़ है  या चाँदनियों से घिरा चाँद है! - मनोज 'मानस रूमानी'
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फ़िरदौस-ए-वतन! क़ुदरत का हक़ीक़त में हसीन ख़्वाब है यह  झीलों, रंगीन फूलों-पत्तों का शबाब है यह! प्रेमियों को लुभानेवाला खास गुलशन है यह  हुस्न-ओ-इश्क़ का हमेशा जवाँ नज़ारा है यह! - मनोज 'मानस रूमानी'
जिस जहाँ में तुम नफ़रत फैला रहे हो  उसी जहाँ में हम मोहब्बत बढ़ा रहे है! - मनोज 'मानस रूमानी'
तेरे इश्क़ के ग़ुलाबी रंग में..  मेरे अश्क़ का पानी न मिले! - मनोज 'मानस रूमानी'
खूब बनाते रहीए नए दोस्त दुनियाँ में..  ध्यान रहें इसमें पुराने दोस्त न बिछड़े! - मनोज 'मानस रूमानी'
कुदरत का हक़ीक़त में हसीन ख़्वाब हो तुम..  गुलशन में खिला हुआ लुभावना फूल हो तुम! चित्रकार ने बनायी ख़ूबसूरत तस्वीर हो तुम  शायर ने लिखी हुई दिलक़श नज़्म हो तुम! - मनोज 'मानस रूमानी'
ईद के वक़्त लिखा..  कहते इंतज़ार-ए-चाँद ऐसा है..  जैसे कोई अपने मेहबूब का करे! हमारी मुबाऱकबाद कबूल कर ले  चाँद रात के खूब शबाब के लिए! - मनोज 'मानस रूमानी'
ईद के वक़्त लिखा..  ईद आते ही नज़दीक  रूमानी हो जाए दिल! ख्वाहीश ईदी की यह  कि हो दीदार-ए-हुस्न! - मनोज 'मानस रूमानी'
आने से यहाँ उसके गुलज़ार हो गया  अब खाली नहीं रहा यह दिल हमारा  प्यार से यहाँ सिर्फ उसी को है रखना  चाह कर उसे दिल-ओ-जान से ज़्यादा! - मनोज 'मानस रूमानी'
होती होगी लोगों की सुबह भगवान के दर्शन से.. हमारी सबा होती है उनकी ख़ूबसूरत छवि देख के  सोने से पहले लोग नाम उपरवाले का जपते होंगे.. हम शब्बा ख़ैर करते ख़्वाब में दीदार-ए-हुस्न करने! - मनोज 'मानस रूमानी'
हुस्न आपका हमेशा खिलता रहें  शायरी हमारी रूमानी होती रहें! - मनोज 'मानस रूमानी'
मेरी पहली रुबाई! यह रुबाई नज़र कर रहा हूँ किसी ज़माने की अच्छी सहेली को..जो हमेशा साथ रहेती थी..लेकिन मैं ही उसके जज़्बात समझ नहीं सका! अब काश वह यह जान ले!...  हमसफ़र ! हमको वह कहते है की 'अब हमसफ़र बनाओ किसीको!' अब उनको यह कैसे कहे की 'बनाना तो था आप ही को!' दिमाख कोशिश करता है काबू करने जज़्बात-ए-दिल को  लेकिन दिल है के ज़ेवर की तरह संभाल के रखा है उनको! - मनोज 'मानस रूमानी'
देखता हूँ एक चेहरा ख़ूबसूरत.. रहेता है अक़सर गुमसुम मायूस  कैसे खिलेंगी इस पर तबस्सुम? शायद मोहब्बत हो इसका हल! - मनोज 'मानस रूमानी'
माना हूर हो आसमान से आयी  माना नूऱ हो रोशन-ए-हुस्न की! अगर इनायत हो जाए शबाब की  तो बरक़त है आशिक़-ए-जहाँ की! - मनोज 'मानस रूमानी'
ख़्वाबगाह  में हो दीदार-ए-हुस्न इस ख़याल से करते शब्बा ख़ैर! - मनोज 'मानस रूमानी'
रूमानियत भरा था लिखना.. मिज़ाज़ भी हमारा शायराना! शुक्रगुज़ार हूँ हुस्नवालों का.. कि शायर 'रूमानी' बना दिया! - मनोज 'मानस रूमानी'
हो अपने देस में..या हो परदेस  होता वैसा लिबास..वैसा अंदाज़  हो बारीश, जाड़ों या ग़र्मी के दिन  चमकता है उसका..नूऱ-ए-हुस्न! - मनोज 'मानस रूमानी'
इंतज़ार-ए-ग़ुल! गुलशन-ए-जहाँ हो रहें है आबाद  खिल, महेक रहां है गुल हर जगह  चमनवाले हो रहें है अब मुश्ताक़  कब हो जाए उनको दीदार-ए-गुल! - मनोज 'मानस रूमानी'