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Showing posts from 2026
ख़ुद-कफ़ील हो अवाम जिस सरज़मीन मिटा नहीं सकता कोई ऐसी सरज़मीन! - मानस रूमानी
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उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी
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स्नेह और प्यार उतरता रहें कलम से. शायरी गुलों की तरह खिले दिलों में! - मानस रूमानी ('राष्ट्रीय काव्य माह' की शुभकामनाएं!) (Happy National Poetry Month!)
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जोर-ए-हवा से बेमौसम बारिश आई यादों के हसीन पन्ने यूँ उड़ा के गई! - मानस रूमानी
गलिच्छ भोंदूगिरी नि भ्रष्ट राजकारणी समाज व्यवस्थेची अगदी वाट लावली! - मानस रूमानी
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ईद की दिली मुबारक़बाद! अमन, भाईचारे का समाँ हर तरफ़ हो प्यार की शमा रोशन हर दिल में हो! - मानस रूमानी
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नव वर्ष..विचार!! चैत्रातील हा नव वर्षारंभ घेऊन येवो नव चैतन्य..! 'वसुधैव कुटुंबकम्' विचारानं सर्व मानवजातीच्या प्रगतीचं! धर्म-जात सर्व भेद विसरून.. प्रेम, स्नेह भाव रुजवण्याचं! - मानस रूमानी
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ताज्जुब की इसका इल्म भी नहीं उन्हें हम ताउम्र मन ही मन चाहते रहे जिन्हें - मानस रूमानी  
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उम्मीदों के फूल तो खिलते ही रहेंगे.. ख़िज़ाँ को फ़स्ल-ए-गुल में बदल देंगे! - मानस रूमानी
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फूल बनके खिलना चाहती है कलियाँ मुरझा न दो उन्हें, महकने दो आसमाँ! - मानस रूमानी (महिला दिन शुभकामनाएं!)
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नसीम-ए-सहर की लिए आरज़ू गुज़रती हैं वहां पर शब मायूस! - मानस रूमानी
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कोई अपने तकब्बुर में, तो कोई ताबेदारी में चुप्पी साधे हुए सब ताकतवरों के तशद्दुद में - मानस रूमानी
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ये दुनिया किसी की जागीर नहीं ये किसी के इशारे पे नहीं चलेगी - मानस रूमानी  
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ये दुनिया है की जंग से बाज आती नहीं और हम है की चाहते दुनिया प्यार की! - मानस रूमानी
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अडथळा येत नसतो प्रेमात भाषेचा.. डोळ्यांतुन व्यक्त होते ते शब्दांविना! - मानस रूमानी (मराठी राजभाषा दिन शुभेच्छा!)
दो दिलों की दास्ताँ कोई कैसे लिखे 💕 जब साथ रहा दिल भी बिछड़ने लगे 💔 - मानस रूमानी
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उम्र कितनी भी बढ़े.. दिल जवाँ रहना चाहिए उम्र के हर पड़ाव पर.. दिल आशना रहना चाहिए - मानस रूमानी
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वह कागज़ भी सजा होता था गुलाबों से.. जिस पर दिल से प्यार के अल्फ़ाज़ उतरते! - मानस रूमानी
दिल कई बिखरे पड़े हैं यहाँ वहाँ.. फिर भी जोश-ए-इश्क़ है यहाँ वहाँ - मानस रूमानी
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खिलतें रहें यूँ ही गुलाब हुस्न के.. रंगे फ़िज़ा इश्क़ की रूमानियत में - मानस रूमानी (वैलेंटाइन वीक!)
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मौजूद अब भी है कंक्रीट जंगल में शजर वजूद के लिए शहर में क्यूँ परेशाँ है बशर - मानस रूमानी
ज़ोर-ए-सियासत का ऐसा असर 😕 रिवाज, जज़्बात भी होतें बेअसर 😑 - मानस रूमानी
मिली ज़िंदगी पर ग़ुरूर ठीक नहीं 😐 कभी भी ज़िंदगी करवट ले लेंगी! 😞 - मानस रूमानी
आधी होऊ दे तर बोलणे मग होईलच गोड बोलणे!   - मानस रूमानी (संक्रांतीच्या शुभेच्छा!) 🍪
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हो..तमन्ना पूर्ति का उम्मीद, उमंग से भरा प्यार-भाईचारे से खिला मुबारक यह साल नया! - मानस रूमानी