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ईद की दिली मुबारक़बाद! अमन, भाईचारे का समाँ हर तरफ़ हो प्यार की शमा रोशन हर दिल में हो! - मनोज 'मानस रूमानी'
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नव वर्ष..विचार!! चैत्रातील हा नव वर्षारंभ घेऊन येवो नव चैतन्य..! 'वसुधैव कुटुंबकम्' विचारानं सर्व मानवजातीच्या प्रगतीचं! धर्म-जात सर्व भेद विसरून.. प्रेम, स्नेह भाव रुजवण्याचं! - मनोज 'मानस रूमानी'
कही ख़िज़ाँ में भी फूल खिलतें रहतें हैं कही बहार सिर्फ़ आती-जाती रहती हैं! - मनोज 'मानस रूमानी'
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काश आप रहनुमा होते.. राह भटके ज़िंदगी के..! हमराह यूँ हसीन होते.. खिलते गुल इश्क़ के! - मनोज 'मानस रूमानी'
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रूबरू की गुंजाइश नहीं.. दीदार-ए-यार ख़्वाब में ही! वैसे भी अब मुलाक़ात की.. हसीन कहानी नहीं होंगी..! - मनोज 'मानस रूमानी'
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कोई अव्यक्त रहता है उसे चाहते.. किसी को जो यूँ ही मिल जाती है! - मनोज 'मानस रूमानी'
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जहान-ए-इश्क़ हमारा वहीं थम गया हैं.. जहाँ आपसे ऐ हसीन सनम हम बिछड़े थे! - मनोज 'मानस रूमानी'