Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps December 04, 2025 दिन मुश्किल से अब है कटता..खत्म न हो रात ऐसा है लगता..ख़्वाब-ओ-ख़याल में सुकूँ मिलता!- मानस रूमानी(विधा: 'त्रिवेणी' काव्य प्रकार!) Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
June 02, 2025 हमनफ़स जैसे दिल लगाते हैं कोई, फिर तन्हा क्यों छोड़ जाते हैं कोई? - मनोज 'मानस रूमानी' Read more
June 14, 2025 कौन क्या जाने सफर कहाँ ले जा रहा है उन्हें ज़िंदगी से ही रुख़सत किए जानेवाला है उन्हें! - मनोज मानस रूमानी' Read more
March 02, 2022 बड़ा गुमान रहता बुलंदी पर पहुँचने में दस्तरस अगर दिल तक हो तो माने! - मनोज 'मानस रूमानी' Read more
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