Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps September 13, 2019 क्या सच होगा यह ख़्वाब कभी.. ख़त्म हो जुदाई, हटे सरहद भी! एक जड़ के रहतें इस-उस तरफ मिटाएं झगड़े और होंगे एक ही!- मनोज 'मानस रूमानी' Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
April 03, 2026 जोर-ए-हवा से बेमौसम बारिश आई यादों के हसीन पन्ने यूँ उड़ा के गई! - मानस रूमानी Read more
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