Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps October 17, 2019 सत्तेच्या या क्रूर खेळात.. 'हाता'वरच्या रेषा होतायत पुसट 'घड्याळा'ला ही लागलीये घरघर नि दिशा चाचपडतंय 'राज'कारण! - मनोज 'मानस' Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
April 03, 2026 जोर-ए-हवा से बेमौसम बारिश आई यादों के हसीन पन्ने यूँ उड़ा के गई! - मानस रूमानी Read more
Comments
Post a Comment