Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps February 14, 2020 हुस्न-ए-जन्नत ऐसा होता है मेहरबाँ कभी..जमीं पर उतरती हैं तब हुस्नपरी ऐसी कभी!- मनोज 'मानस रूमानी' {'मलिका-ए-हुस्न' मुमताज़ जहाँ 'मधुबाला' के जनमदिन पर!} Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
April 03, 2026 जोर-ए-हवा से बेमौसम बारिश आई यादों के हसीन पन्ने यूँ उड़ा के गई! - मानस रूमानी Read more
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