Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps December 11, 2021 पर्वतों का ख़ूबसूरत नज़ारा हैंहुस्न भी अपने पुरे शबाब में हैंतो हसीन ग़ज़ल लिख़ जानी हैदिल आशना को इश्क़ होना है- मनोज 'मानस रूमानी'(आज के 'अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिन' पर!) Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
April 03, 2026 जोर-ए-हवा से बेमौसम बारिश आई यादों के हसीन पन्ने यूँ उड़ा के गई! - मानस रूमानी Read more
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