वो महताब रही तो वो आफ़ताब थे..
'प्यासा' रहा 'चौदहवीं का चाँद' थे!
- मनोज 'मानस रूमानी'
(अपने भारतीय सिनेमा के मेरे एक अज़ीज़ लाजवाब अभिनेता-फ़िल्मकार गुरुदत्त साहब को उनके ९७ वे जनमदिन पर याद करतें!)
ख़ुद-कफ़ील हो अवाम जिस सरज़मीन मिटा नहीं सकता कोई ऐसी सरज़मीन! - मानस रूमानी

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