Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps March 30, 2025 नव वर्ष..विचार!!चैत्रातील हा नव वर्षारंभघेऊन येवो नव चैतन्य..!'वसुधैव कुटुंबकम्' विचारानंसर्व मानवजातीच्या प्रगतीचं!धर्म-जात सर्व भेद विसरून..प्रेम, स्नेह भाव रुजवण्याचं!- मनोज 'मानस रूमानी' Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
April 03, 2026 जोर-ए-हवा से बेमौसम बारिश आई यादों के हसीन पन्ने यूँ उड़ा के गई! - मानस रूमानी Read more
Comments
Post a Comment