Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps September 24, 2020 बरसात में झाँक लिया खिड़की से दिल लुभा गया भीगा सुहाना समां आँखें ढूंढ़ती रही रूमानी अतीत में भीगे दुपट्टे से उस हसीं का झाँकना - मनोज 'मानस रूमानी' Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
April 03, 2026 जोर-ए-हवा से बेमौसम बारिश आई यादों के हसीन पन्ने यूँ उड़ा के गई! - मानस रूमानी Read more
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