Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps September 18, 2020 ये हुस्न-ए-नफ़ीस तेरा ये शबाब क्या कहना.. ये नज़ाकत, नफ़ासत ये अदा क्या कहना..! - मनोज 'मानस रूमानी' Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
April 03, 2026 जोर-ए-हवा से बेमौसम बारिश आई यादों के हसीन पन्ने यूँ उड़ा के गई! - मानस रूमानी Read more
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