Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps March 29, 2023 पुन्हा धुळवड दोन रंगांची..अस्तित्वाची नि हुकुमतीची!मिसळावी यात बंधुभावाचीमाणूसकीची आणि प्रेमाची.!- मनोज 'मानस रुमानी' Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
April 03, 2026 जोर-ए-हवा से बेमौसम बारिश आई यादों के हसीन पन्ने यूँ उड़ा के गई! - मानस रूमानी Read more
Comments
Post a Comment