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दिखें चाँद और महताब! आसमाँ-सितारें जब शबाब में होतें ख़्वाबगाह में हसीन ख्याल हैं आतें शायद चाँद पूरा शबाब में होगा उसपे भी इश्क़ का ख़ुमार होगा अबतक न दिखा चाँद, न महताब गुज़र न जाए वह बगैर दीदार शब् हमें तो जुस्तजू हैं हमारे चाँद की उस जमाल-ए-हुस्न महजबीं की - मनोज 'मानस रूमानी'
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एहसास हो रहा है.. आप लौट आयी हैं! प्रियंका जी में आप.. हमें नज़र आ रही हैं! - मनोज 'मानस रूमानी' (आज अपने भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी के स्मृतिदिन पर उन्हें सलाम करते हुए इस आशावादी चित्र पर मैंने ग़ौर किया है!)
आसमाँ-सितारें जब ऐसे शबाब में होतें 🌙 ख़्वाबगाह में उनके हसीन ख्याल आतें 💗 - मनोज 'मानस रूमानी'
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ग़म-ए-दिल! दुख तो सब जतातें है.. किसी के गुज़रने के बाद कौन जाने होता इस में.. कितना सच, कितना झूठ पर मायूसी होंगी कहीं पे.. यक़ीनन हम जाने के बाद आंसूं जो टपकेंगे वहीँ से.. पहुंचाएंगे दबा हुआ प्यार! - मनोज 'मानस रूमानी' (काल्पनिक रचना एवं चित्र!)
बुरे दिन!! प्यार की निशानी ताज को कोसना.. प्रेमी सैलानीयों से छेड़खानी करना.. गरीब किसान की फसल रौंद देना.. यह आपका अच्छे दिन का सपना? - मनोज 'मानस रूमानी'
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कली के साथ खिल रहा था.. पतझड़ में जो गिरा वह फूल! तो डाली के साथ कही लगके.. कली फ़िज़ा में ख़ूब गयी खिल! - मनोज 'मानस रूमानी'
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आराइश इस ज़रुल पर हैं कुदरत का शाहकार इश्क़ बयां करने का.. ख़ूब-रु का हो अंदाज़! - मनोज 'मानस रूमानी'