Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps October 28, 2021 ग़म-ए-दिल!दुख तो सब जतातें है..किसी के गुज़रने के बादकौन जाने होता इस में..कितना सच, कितना झूठपर मायूसी होंगी कहीं पे..यक़ीनन हम जाने के बादआंसूं जो टपकेंगे वहीँ से..पहुंचाएंगे दबा हुआ प्यार!- मनोज 'मानस रूमानी'(काल्पनिक रचना एवं चित्र!) Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
April 03, 2026 जोर-ए-हवा से बेमौसम बारिश आई यादों के हसीन पन्ने यूँ उड़ा के गई! - मानस रूमानी Read more
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