Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps October 28, 2021 ग़म-ए-दिल!दुख तो सब जतातें है..किसी के गुज़रने के बादकौन जाने होता इस में..कितना सच, कितना झूठपर मायूसी होंगी कहीं पे..यक़ीनन हम जाने के बादआंसूं जो टपकेंगे वहीँ से..पहुंचाएंगे दबा हुआ प्यार!- मनोज 'मानस रूमानी'(काल्पनिक रचना एवं चित्र!) Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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