Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps October 09, 2021 मुंतज़िर!तअस्सुफ़ हैं नासमझी में छूटी..हमनफ़स जो हो जाती हमसफ़ररहगुज़र सही..मंज़िल की तरफ!फिर दिखें वो नूऱ..राह मंज़िल कीफ़स्ल-ए-गुल के इंतज़ार में अब..दश्त-ए-तन्हाई में पड़े हैं 'मानस'!- मनोज 'मानस रूमानी' Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
June 02, 2025 हमनफ़स जैसे दिल लगाते हैं कोई, फिर तन्हा क्यों छोड़ जाते हैं कोई? - मनोज 'मानस रूमानी' Read more
June 14, 2025 कौन क्या जाने सफर कहाँ ले जा रहा है उन्हें ज़िंदगी से ही रुख़सत किए जानेवाला है उन्हें! - मनोज मानस रूमानी' Read more
March 02, 2022 बड़ा गुमान रहता बुलंदी पर पहुँचने में दस्तरस अगर दिल तक हो तो माने! - मनोज 'मानस रूमानी' Read more
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