Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps October 09, 2021 मुंतज़िर!तअस्सुफ़ हैं नासमझी में छूटी..हमनफ़स जो हो जाती हमसफ़ररहगुज़र सही..मंज़िल की तरफ!फिर दिखें वो नूऱ..राह मंज़िल कीफ़स्ल-ए-गुल के इंतज़ार में अब..दश्त-ए-तन्हाई में पड़े हैं 'मानस'!- मनोज 'मानस रूमानी' Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
April 03, 2026 जोर-ए-हवा से बेमौसम बारिश आई यादों के हसीन पन्ने यूँ उड़ा के गई! - मानस रूमानी Read more
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