Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps October 09, 2017 फूलों से समेटा देखा चेहरा हसीन.. गालों पे थी निखरी गुलाबी रंगत.. उस पर खिलखिलाती तबस्सुम .. सोचा कहूं तुम ही ज़ीनत-ए-गुलशन! - मनोज 'मानस रूमानी' Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
March 21, 2026 ईद की दिली मुबारक़बाद! अमन, भाईचारे का समाँ हर तरफ़ हो प्यार की शमा रोशन हर दिल में हो! - मानस रूमानी Read more
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