Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps December 27, 2022 तब जो दिन-ब-दिन साथ होते थे,अब वो साल-दर-साल दूर ही रहे हैंतब मेल-जोल के अपने दौर में थे,अब बदलते वक़्त ने दूरियाँ दी हैं!- मनोज 'मानस रूमानी' Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
April 03, 2026 जोर-ए-हवा से बेमौसम बारिश आई यादों के हसीन पन्ने यूँ उड़ा के गई! - मानस रूमानी Read more
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