Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps December 07, 2022 वो देखती हैं रंगीन ख़ूबसूरत समां का..रौशन हुआ नज़ारा उसके नूऱ-ए-हुस्न से!उठती उस तरफ़ भी इक निगाह-ए-मेहरबाँ..जहाँ कहीं हैं आशिक़ मुतासिर उसके हुस्न से!- मनोज 'मानस रूमानी' Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
June 02, 2025 हमनफ़स जैसे दिल लगाते हैं कोई, फिर तन्हा क्यों छोड़ जाते हैं कोई? - मनोज 'मानस रूमानी' Read more
June 14, 2025 कौन क्या जाने सफर कहाँ ले जा रहा है उन्हें ज़िंदगी से ही रुख़सत किए जानेवाला है उन्हें! - मनोज मानस रूमानी' Read more
March 02, 2022 बड़ा गुमान रहता बुलंदी पर पहुँचने में दस्तरस अगर दिल तक हो तो माने! - मनोज 'मानस रूमानी' Read more
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