Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps January 21, 2021 कभी साथी रहतें हैं हमनफ़स की तरहना होती हैं हमसफ़र होने की सोच तबख़ामोश इश्क़ जानने होती है देर अक़्सरसिवाय दर्द-ए-फ़ुर्क़त कुछ न रहता तब- मनोज 'मानस रूमानी' Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
April 03, 2026 जोर-ए-हवा से बेमौसम बारिश आई यादों के हसीन पन्ने यूँ उड़ा के गई! - मानस रूमानी Read more
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