मेरे इस 'शायराना' ब्लॉग पर मैं..'मनोज 'मानस रूमानी' इस नाम से मेरी शायरी लिख रहां हूँ! - मनोज कुलकर्णी (पुणे).
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मौसम की बेरुख़ी!
अब तक हम थें जिन्होनें वक़्त पर कुछ नहीं किया अब मौसम भी हैं बिगड़ें बेवक़्त बरसने लगी वर्षा कड़ी धुप पड़ती बारिश में कभी जाड़ों में गर्म हवा! ग़र हम सब वक़्त पर करें मौसम भी हमें देंगे सदा!
- मनोज 'मानस रूमानी'
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हमनफ़स जैसे दिल लगाते हैं कोई, फिर तन्हा क्यों छोड़ जाते हैं कोई? - मनोज 'मानस रूमानी'
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