Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps January 28, 2021 महज पत्तें नहीं होतें वेपतझड़ में जो गिरतें हैंदरअसल वो तरीका होता हैपेड़ फूलने का नये सिरे से!सोचा, इस मंज़र से गुज़रते..हम भी छोड़े ऐसी पुरानी बातेंजीने की नयी राह तराश लें..अपनी ज़िंदगी हसीन कर ले!- मनोज 'मानस रूमानी' Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
June 02, 2025 हमनफ़स जैसे दिल लगाते हैं कोई, फिर तन्हा क्यों छोड़ जाते हैं कोई? - मनोज 'मानस रूमानी' Read more
June 14, 2025 कौन क्या जाने सफर कहाँ ले जा रहा है उन्हें ज़िंदगी से ही रुख़सत किए जानेवाला है उन्हें! - मनोज मानस रूमानी' Read more
March 02, 2022 बड़ा गुमान रहता बुलंदी पर पहुँचने में दस्तरस अगर दिल तक हो तो माने! - मनोज 'मानस रूमानी' Read more
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