ईर्ष्या, मुक़ाबला ये अल्फ़ाज़ नहीं आतें
ऐसे जज़्बाती क़लमकारों की दोस्ती में
खिलखिलाती हैं शेर-ओ-शायरी प्यार की
महफ़िल इन सुख़नवरों की जब सजती हैं!
- मनोज 'मानस रूमानी'
(मशहूर लेखक-शायर जावेद अख़्तर जी पर लिखी गई किताब 'जादूनामा' का विमोचन हालही में जानेमाने
लेखक-शायर गुलज़ारजी के हाथों हुआ। तब इन दो दिग्गजों के बीच की गहरी
दोस्ती की जैसे महफ़िल खिली थी! उसपर उनको मुबारक़बाद देते हुए मैंने लिखा!)
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हो मयस्सर सफ़र! जी तो करता हैं खूब घूमें दुनिया का हसीं नज़ारा देखें अब बहलाते हैं सफरनामें रह गया है कुछ तसव्वुर में हो मयस्सर जहाँ जी चाहें घूमें कश्मीर की हसीं वादियां देखें लखनऊ की नजाकत, नफासत शायराना माहौल भी आजमायें रूमानी पेरिस का सफर करें रंगीन शाम का लुत्फ़ उठाये अपने ताज़ का फ़िर दीदार करे चाँद देखके इज़हार-ए-इश्क़ करे - मनोज 'मानस रूमानी' ('विश्व पर्यटन दिन' पर लिखा!)

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