Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps October 02, 2020 क्या यही था अपने सपने का आज़ाद मुल्क़? देखकर सोचते होंगे बापू और बादशाह ख़ान! - मनोज 'मानस रूमानी' (महात्मा गाँधीजी की १५१ वी जयंती पर इनको प्रणाम करते लिखा!) Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
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