Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps October 07, 2020 ज़ीनत थी यहाँ बाग़-ए-हुस्न कीदिल लुभाने वाली थी तबस्सुम आप की मुमताज़ आप अब जन्नत की! - मनोज 'मानस रूमानी'(मधुबाला की इस रंगीन हसीन गिफ इमेज देख कर मैंने यह हाइकु लिखी!) Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
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