Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps May 31, 2021 ज़ीनत-ए-गुलशन भी मुश्ताक़ हैं 🥀हुस्न-ओ-इश्क़ का नज़ारा देखने 💞- मनोज 'मानस रूमानी' Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
April 03, 2026 जोर-ए-हवा से बेमौसम बारिश आई यादों के हसीन पन्ने यूँ उड़ा के गई! - मानस रूमानी Read more
Comments
Post a Comment