Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps June 14, 2021 जब मेहरबाँ हुआ थाहुस्न-ए-जन्नत-ज़ारतब यह मुमताज़ जहाँतशरीफ़ लायी ज़मीं पर- मनोज 'मानस रूमानी'['मलिका-ए-हुस्न' मुमताज़ जहाँ याने मधुबाला की यह अभिजात प्रतिमा..के. आसिफ की क्लासिक फ़िल्म 'मुग़ल-ए-आज़म' (१९६०) से!] Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
April 03, 2026 जोर-ए-हवा से बेमौसम बारिश आई यादों के हसीन पन्ने यूँ उड़ा के गई! - मानस रूमानी Read more
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