Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps June 14, 2021 जब मेहरबाँ हुआ थाहुस्न-ए-जन्नत-ज़ारतब यह मुमताज़ जहाँतशरीफ़ लायी ज़मीं पर- मनोज 'मानस रूमानी'['मलिका-ए-हुस्न' मुमताज़ जहाँ याने मधुबाला की यह अभिजात प्रतिमा..के. आसिफ की क्लासिक फ़िल्म 'मुग़ल-ए-आज़म' (१९६०) से!] Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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June 14, 2025 कौन क्या जाने सफर कहाँ ले जा रहा है उन्हें ज़िंदगी से ही रुख़सत किए जानेवाला है उन्हें! - मनोज मानस रूमानी' Read more
March 02, 2022 बड़ा गुमान रहता बुलंदी पर पहुँचने में दस्तरस अगर दिल तक हो तो माने! - मनोज 'मानस रूमानी' Read more
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