Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps August 18, 2021 जाड़ों की नर्म धुप हो या... ग़र्मी में पत्तों की सरसराहट!सरलता से मुख़ातिब होते है..ज़िदगी पर आपके अल्फ़ाज़!- मनोज 'मानस रूमानी'(कवी-गीतकार गुलज़ार साहब को सालगिरह की मुबारक़बाद देते समय याद आ रहीं हैं उनसे मुलाकातें और मेरे 'चित्रसृष्टी' संगीत विशेषांक की उन्होंने की सराहना!) Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
June 02, 2025 हमनफ़स जैसे दिल लगाते हैं कोई, फिर तन्हा क्यों छोड़ जाते हैं कोई? - मनोज 'मानस रूमानी' Read more
June 14, 2025 कौन क्या जाने सफर कहाँ ले जा रहा है उन्हें ज़िंदगी से ही रुख़सत किए जानेवाला है उन्हें! - मनोज मानस रूमानी' Read more
March 02, 2022 बड़ा गुमान रहता बुलंदी पर पहुँचने में दस्तरस अगर दिल तक हो तो माने! - मनोज 'मानस रूमानी' Read more
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