Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps August 18, 2021 जाड़ों की नर्म धुप हो या... ग़र्मी में पत्तों की सरसराहट!सरलता से मुख़ातिब होते है..ज़िदगी पर आपके अल्फ़ाज़!- मनोज 'मानस रूमानी'(कवी-गीतकार गुलज़ार साहब को सालगिरह की मुबारक़बाद देते समय याद आ रहीं हैं उनसे मुलाकातें और मेरे 'चित्रसृष्टी' संगीत विशेषांक की उन्होंने की सराहना!) Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
April 03, 2026 जोर-ए-हवा से बेमौसम बारिश आई यादों के हसीन पन्ने यूँ उड़ा के गई! - मानस रूमानी Read more
Comments
Post a Comment