वो दौर गया जब सिर्फ भाई बहनों की रक्षा करतें थें
नए दौर में बहनें भी कभी भाइयों की रक्षा करती हैं
जज़्बातों को संभालकर स्वाभिमान बरक़रार रखें वे
सलामत रहें भाई-बहनों का ऐसा प्यार दुनिया में!
- मनोज 'मानस रूमानी'
ख़ुद-कफ़ील हो अवाम जिस सरज़मीन मिटा नहीं सकता कोई ऐसी सरज़मीन! - मानस रूमानी

Comments
Post a Comment