वो दौर गया जब सिर्फ भाई बहनों की रक्षा करतें थें
नए दौर में बहनें भी कभी भाइयों की रक्षा करती हैं
जज़्बातों को संभालकर स्वाभिमान बरक़रार रखें वे
सलामत रहें भाई-बहनों का ऐसा प्यार दुनिया में!
- मनोज 'मानस रूमानी'
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हो मयस्सर सफ़र! जी तो करता हैं खूब घूमें दुनिया का हसीं नज़ारा देखें अब बहलाते हैं सफरनामें रह गया है कुछ तसव्वुर में हो मयस्सर जहाँ जी चाहें घूमें कश्मीर की हसीं वादियां देखें लखनऊ की नजाकत, नफासत शायराना माहौल भी आजमायें रूमानी पेरिस का सफर करें रंगीन शाम का लुत्फ़ उठाये अपने ताज़ का फ़िर दीदार करे चाँद देखके इज़हार-ए-इश्क़ करे - मनोज 'मानस रूमानी' ('विश्व पर्यटन दिन' पर लिखा!)

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