Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps July 28, 2020 ज़ीनत-ए-हुस्न! क्या रंग भरोंगें आप उसमे जो थी अपने हुस्न में रंगी! सब रंग के फूल पड़ेंगे फ़िके.. ज़ीनत हैं वो बाग़-ए-हुस्न की! - मनोज 'मानस रूमानी' Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
April 03, 2026 जोर-ए-हवा से बेमौसम बारिश आई यादों के हसीन पन्ने यूँ उड़ा के गई! - मानस रूमानी Read more
Comments
Post a Comment