Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps July 23, 2020 मिलते हैं जब दो किस्म के.. नग़्मानिगार और मौसिक़ार गिले-शिक़वे नहीं, होती है.. शायरी-जाम की महफ़िल! - मनोज 'मानस रूमानी' (मशहूर गीतकार आनंद बख्शी जी और प्रतिभाशाली संगीतकार ख़य्याम जी की एकसाथ की यह तस्वीर देखकर लिखा!) Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
April 03, 2026 जोर-ए-हवा से बेमौसम बारिश आई यादों के हसीन पन्ने यूँ उड़ा के गई! - मानस रूमानी Read more
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