Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps July 23, 2020 मिलते हैं जब दो किस्म के.. नग़्मानिगार और मौसिक़ार गिले-शिक़वे नहीं, होती है.. शायरी-जाम की महफ़िल! - मनोज 'मानस रूमानी' (मशहूर गीतकार आनंद बख्शी जी और प्रतिभाशाली संगीतकार ख़य्याम जी की एकसाथ की यह तस्वीर देखकर लिखा!) Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
Comments
Post a Comment