Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps July 19, 2020 आदाब अर्ज़ हैं.! तख़्लीक़-ए-अदब उन्हें क्या बताये 'मानस' जो नहीं क़द्रदान-ए-क़लम और हैं नासमझ! - मनोज 'मानस रूमानी' Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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April 03, 2026 जोर-ए-हवा से बेमौसम बारिश आई यादों के हसीन पन्ने यूँ उड़ा के गई! - मानस रूमानी Read more
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