Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps July 25, 2021 सिर्फ़ सिनेमा बसा था उनकी रूह-सांस मेंज़िंदगी भर वे उसी की हिफ़ाज़त करते रहेरहनुमा थे वे हम सिनेमा के मुसाफ़िर के..रहे उनके नक़्श-ए-क़दम इस पर लिखते!- मनोज 'मानस रूमानी'(गुरुपूर्णिमा के दिन हमारे आदर्श फ़िल्म हिस्टॉरियन..आदरणीय पी. के. नायर साहब को याद करते!) 🙏 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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