Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps July 25, 2021 सिर्फ़ सिनेमा बसा था उनकी रूह-सांस मेंज़िंदगी भर वे उसी की हिफ़ाज़त करते रहेरहनुमा थे वे हम सिनेमा के मुसाफ़िर के..रहे उनके नक़्श-ए-क़दम इस पर लिखते!- मनोज 'मानस रूमानी'(गुरुपूर्णिमा के दिन हमारे आदर्श फ़िल्म हिस्टॉरियन..आदरणीय पी. के. नायर साहब को याद करते!) 🙏 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
May 21, 2026 बैठे थे वहाँ पीते चाय.. जहाँ पुरानी यादें हैं जुड़ी महफ़िल-ए-यारां वह.. हमनफ़स वो अब नहीं! - मानस रूमानी ('होटल रूपाली', पुणे में चाय पीते!) (अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस पर!) Read more
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