Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps July 25, 2021 सिर्फ़ सिनेमा बसा था उनकी रूह-सांस मेंज़िंदगी भर वे उसी की हिफ़ाज़त करते रहेरहनुमा थे वे हम सिनेमा के मुसाफ़िर के..रहे उनके नक़्श-ए-क़दम इस पर लिखते!- मनोज 'मानस रूमानी'(गुरुपूर्णिमा के दिन हमारे आदर्श फ़िल्म हिस्टॉरियन..आदरणीय पी. के. नायर साहब को याद करते!) 🙏 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
June 02, 2025 हमनफ़स जैसे दिल लगाते हैं कोई, फिर तन्हा क्यों छोड़ जाते हैं कोई? - मनोज 'मानस रूमानी' Read more
June 14, 2025 कौन क्या जाने सफर कहाँ ले जा रहा है उन्हें ज़िंदगी से ही रुख़सत किए जानेवाला है उन्हें! - मनोज मानस रूमानी' Read more
March 02, 2022 बड़ा गुमान रहता बुलंदी पर पहुँचने में दस्तरस अगर दिल तक हो तो माने! - मनोज 'मानस रूमानी' Read more
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