Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps July 21, 2021 शब-ब-ख़ैर!चाँद रात हर रोज़ ही रहेंसमां भी पूरे शबाब में रहेंहुस्न इश्क़ के आग़ोश मेंऔर शायराना इज़हार रहें- मनोज 'मानस रूमानी' Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
June 02, 2025 हमनफ़स जैसे दिल लगाते हैं कोई, फिर तन्हा क्यों छोड़ जाते हैं कोई? - मनोज 'मानस रूमानी' Read more
June 14, 2025 कौन क्या जाने सफर कहाँ ले जा रहा है उन्हें ज़िंदगी से ही रुख़सत किए जानेवाला है उन्हें! - मनोज मानस रूमानी' Read more
March 02, 2022 बड़ा गुमान रहता बुलंदी पर पहुँचने में दस्तरस अगर दिल तक हो तो माने! - मनोज 'मानस रूमानी' Read more
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