Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps July 29, 2021 रूमानी मैना!बगीचे में कुछ दिन मुख़्तलिफ़ आवाज़ें सुनींपंछी की ही..कभी सीटी..कभी गुफ़्तगू जैसीपेड़ से गायब होती..रूबरू जायज़ा लेते समयअब हुआ मालुम..मैना थी बाकमाल हुनर की- मनोज 'मानस रूमानी' Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
April 07, 2026 उल्फ़त में होती है नफ़ीस रूमानी शायरी. फ़ुर्क़त में बयाँ होती है उसके बिना ज़िंदगी - मानस रूमानी Read more
April 03, 2026 जोर-ए-हवा से बेमौसम बारिश आई यादों के हसीन पन्ने यूँ उड़ा के गई! - मानस रूमानी Read more
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